कांग्रेस का आरोप, BJP नेतृत्व को मिली 1800 करोड़ की रिश्वत
लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार अपने चरम पर है, राजनीतिक पार्टियों के बीच एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है. शुक्रवार को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, उन्होंने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की ओर से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को रिश्वत दी गई थी.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि बीएस येदियुरप्पा की 'येद्दी डायरी' में जिक्र किया गया है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को करीब 1800 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये रिश्वत बीजेपी की केंद्रीय कमेटी को दी गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे बड़े नेता शामिल हैं.
सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री को सबके सामने आकर इसका सच बताना चाहिए, इससे पता चल जाएगा कि चौकीदार चोर है या फिर चौकीदार जांच को तैयार है. उन्होंने सवाल दागा कि क्या प्रधानमंत्री सामने आकर मानेंगे कि इस जांच कराएंगे. कांग्रेस नेता बोले कि सरकार आगे बढ़कर खुद क्यों नहीं कहती कि डायरी की जांच कराई जाएगी. सवाल बहुत तीखे हैं इन सवालों का जवाब चोर चौकीदार को देना है.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस दौरान एक न्यूज़ मैग्जीन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया. साथ ही उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार और बीएस येदियुरप्पा के बीच बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट भी पढ़ी. उन्होंने कहा कि इस डायरी में बीएस येदियुरप्पा के सिग्नेचर हैं, साथ ही इनकम टैक्स के भी इसमें साइन हैं. ऐसे में अभी तक केंद्र सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.
लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो रही नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का विषय ही ऐसा है कि हर कोई इस पर बात कर रहा है. फिल्म का ट्रेलर आ गया है. एक तबका कह रहा है कि फिल्म खासतौर से चुनाव में मोदी को फायदा पहुंचाने और प्रचार के लिए बनाई गई है.
लेकिन 5 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म, अगर ट्रेलर का ही विस्तार होगी तो इस बात की आशंका प्रबल है कि फिल्म, मोदी का प्रचार करने से कहीं ज्यादा उनका मजाक उड़ाने में इस्तेमाल हो. ऐसा घटनाओं की अतिनाटकीय प्रस्तुति की वजह से हो सकता है. मोदी को निर्भीक, निडर राष्ट्रवादी और हीरो के रूप में दिखाने के लिए जिस तरह से घटनाओं का वर्णन किया गया है वह ट्रेलर में प्रभावी लगने की बजाय मजाकिया नजर आता है.
1992 में बीजेपी ने कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा एकता यात्रा निकालकर झंडा फहराया था. उस वक्त बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा का नेतृत्व किया था. लेकिन "पीएम नरेंद्र मोदी" में इस घटना को बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है. यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. मोदी के ग्रुप को सेना के जवान कवर कर रहे हैं. बड़े पैमाने पर गोलियां चल रही हैं. निर्भीक मोदी हैं कि हाथ में तिरंगा लिए बढ़े ही जा रहे हैं.
ठीक इसी तरह आपातकाल की घटना का भी जिक्र ट्रेलर में नजर आता है. मोदी ने आपातकाल के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया था. लेकिन ट्रेलर में इंदिरा के सामने आपातकाल के दौरान मोदी को कुछ इस तरह से गढ़ा गया है कि वे आपातकाल में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले बहुत बड़े नेता के तौर पर नजर आते हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि बीएस येदियुरप्पा की 'येद्दी डायरी' में जिक्र किया गया है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को करीब 1800 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये रिश्वत बीजेपी की केंद्रीय कमेटी को दी गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी जैसे बड़े नेता शामिल हैं.
सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री को सबके सामने आकर इसका सच बताना चाहिए, इससे पता चल जाएगा कि चौकीदार चोर है या फिर चौकीदार जांच को तैयार है. उन्होंने सवाल दागा कि क्या प्रधानमंत्री सामने आकर मानेंगे कि इस जांच कराएंगे. कांग्रेस नेता बोले कि सरकार आगे बढ़कर खुद क्यों नहीं कहती कि डायरी की जांच कराई जाएगी. सवाल बहुत तीखे हैं इन सवालों का जवाब चोर चौकीदार को देना है.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इस दौरान एक न्यूज़ मैग्जीन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया. साथ ही उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार और बीएस येदियुरप्पा के बीच बातचीत की ट्रांस्क्रिप्ट भी पढ़ी. उन्होंने कहा कि इस डायरी में बीएस येदियुरप्पा के सिग्नेचर हैं, साथ ही इनकम टैक्स के भी इसमें साइन हैं. ऐसे में अभी तक केंद्र सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की.
लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो रही नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का विषय ही ऐसा है कि हर कोई इस पर बात कर रहा है. फिल्म का ट्रेलर आ गया है. एक तबका कह रहा है कि फिल्म खासतौर से चुनाव में मोदी को फायदा पहुंचाने और प्रचार के लिए बनाई गई है.
लेकिन 5 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म, अगर ट्रेलर का ही विस्तार होगी तो इस बात की आशंका प्रबल है कि फिल्म, मोदी का प्रचार करने से कहीं ज्यादा उनका मजाक उड़ाने में इस्तेमाल हो. ऐसा घटनाओं की अतिनाटकीय प्रस्तुति की वजह से हो सकता है. मोदी को निर्भीक, निडर राष्ट्रवादी और हीरो के रूप में दिखाने के लिए जिस तरह से घटनाओं का वर्णन किया गया है वह ट्रेलर में प्रभावी लगने की बजाय मजाकिया नजर आता है.
1992 में बीजेपी ने कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा एकता यात्रा निकालकर झंडा फहराया था. उस वक्त बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा का नेतृत्व किया था. लेकिन "पीएम नरेंद्र मोदी" में इस घटना को बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है. यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. मोदी के ग्रुप को सेना के जवान कवर कर रहे हैं. बड़े पैमाने पर गोलियां चल रही हैं. निर्भीक मोदी हैं कि हाथ में तिरंगा लिए बढ़े ही जा रहे हैं.
ठीक इसी तरह आपातकाल की घटना का भी जिक्र ट्रेलर में नजर आता है. मोदी ने आपातकाल के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नेता के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया था. लेकिन ट्रेलर में इंदिरा के सामने आपातकाल के दौरान मोदी को कुछ इस तरह से गढ़ा गया है कि वे आपातकाल में विपक्ष का नेतृत्व करने वाले बहुत बड़े नेता के तौर पर नजर आते हैं.
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