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Showing posts from December, 2018

इंडोनेशिया में सूनामी का फिर से ख़तरा, अब तक 281 की मौत

इंडोनेशिया में क्रेकाटोआ ज्वालामुखी की सक्रियता को देखते हुए चेतावनी दी गई है कि उसके आसपास के तटीय इलाकों में रहने वाले लोग तटों से दूर रहें क्योंकि सूनामी की लहरें एक बार फिर अपनी विनाशलीला दिखा सकती हैं. इंडोनेशिया में शनिवार को आई सूनामी से मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 281 हो गई है. आशंका है कि ये संख्या और बढ़ सकती है. प्रभावित इलाक़ों में मलबों में दबे लोगों की तलाश की जा रही है. जो अभी तक पता है - कम-से-कम 281 लोगों की मौत, संख्या बढ़ने की आशंका 1,116 से ज़्यादा लोग ज़ख्मी, सैकड़ों इमारतें ध्वस्त सुंडा खाड़ी के दोनों तरफ़ जावा और सुमात्रा के तटीय इलाक़ों में अचानक आई सुनामी सूनामी की वजह एक ज्वालामुखी का फटना हो सकता है जिससे समंदर केज़मीनी हिस्से में हलचल हुई और ऊँची लहरें उठीं फिर से सूनामी आने का ख़तरा, लोगों को तटवर्ती इलाकों से दूर रहने की चेतावनी शनिवार रात 9:30 पर आई सुनामी छुट्टी के दिन आई सुनामी लहरें कई लोकप्रिय पर्यटक स्थलों से टकराई सरकार का कहना है कि सूनामी के बाद कम से कम 1,116 लोग जख़्मी हुए हैं और कई लोग लापता हैं. सुंडा स्ट्रेट (खाड़ी) के आसप...

美国作家兼插画家高栗神秘和可怕的精神世界

从《死小孩》(Gashlycrumb Tinies) 到《犹豫客》(The Doubtful Guest),高栗(Edward Gorey)这些病态有趣的小书,都是哥特式超现实主义的杰作。他从阿加莎·克里斯蒂(Agatha Christie)的推理小说和法国默片等各种来源汲取素材,创造出一个令人毛骨悚然的独特世界,里面充满摇摇欲坠的英式大宅、 神经兮兮的黑眼女郎, 以及板着脸的爱德华时代的绅士。在这里,一切都不似看上去那么平静。他充满艺术感的插图和诗歌文本,被拿来与刘易斯·卡罗尔(Lewis Carroll)、爱德华·李尔(Edward Lear)和塞缪尔·贝克特(Samuel Beckett)相提并论,为他赢得评论界的赞誉,并在他的祖国—— 美国赢得了一票死忠粉。 或许是因为作品难以归类的缘故,在其他地方,他似乎并不大为人所知,但其影响还是随处可见,从蒂姆·伯顿(Tim Burton) 的电影,到尼尔·盖曼( Neil Gaiman)和莱蒙尼·斯尼基特(Lemony Snicket)的小说。 高栗这个人比较复杂,离群索居,以“尽可能让每个人感到不安”为人生使命。他搜集死婴的银版照片,跟2万本书和6只猫独自生活在纽约的公寓里。他蓄着爱德华时代的大胡子,经常穿着长款皮草大衣、运动鞋, 戴着叮当作响的手镯,在纽约城闲逛。 在哈佛,高栗的社交圈围绕着他的第一本大型传记《生来的往生者》(Born to be Posthumous)的作者德里(Mark Dery)所谓的“同性恋文人”展开, 其中包括诗人弗兰克·奥哈拉 (Frank O'hara),两人都对名不见经传的文学作品充满热情。虽然大多数见过他的人都认为他是同性恋, 但他在这个问题上一直闭口不谈。 当一名采访者追问他的性生活时,德里说,“高栗回答:‘首先我是一个人,其次是艺术家,其他的身份都排在最后。’” 高栗的全部作品,毫无疑问贯穿着同性恋、性别流动性和同性伴侣关系的潜流。他在给朋友的一封信中指出,“那些男孩们”(用他自己的话说)似乎是最早欣 赏他非同寻常之作的人之 一

रजनीकांत की फ़िल्म 2.0 के डर में कितनी सच्चाई

एक शख़्स मोबाइल टावर पर चढ़ा और फांसी लगा ली. फिर हज़ारों पक्षी उस टावर के इर्द-गिर्द मंडराने लगे, मानों उस शख़्स की मौत का विलाप कर रहे हों. फिल्म स्टार रजनीकांत की मूवी 2.0 यहीं से शुरू होती है. मूवी के अगले सीन में अचानक लोगों के फ़ोन हवा में उड़ने लगते हैं. हर इंसान का फ़ोन ग़ायब हो चुका है. सरकार ने पूरी पुलिस फ़ोर्स को मोबाइल ढूंढने के काम पर लगा दिया है, लेकिन किसी को पता नहीं चल पा रहा कि फ़ोन आख़िर गए कहां? फिर उन्हीं मोबाइल से बना एक शख़्स सामने आता है. ग़ुस्से से भरी आंखों से वो कहता है, "सेल फ़ोन रखने वाला हर व्यक्ति हत्यारा है." वो हर 'हत्यारे' को सज़ा देना चाहता है. उसका दावा है कि मोबाइल फ़ोन टावर से निकलने वाली रेडिएशन पक्षियों की मौत का कारण है. सारी फ़िल्म इसी दावे के इर्द-गिर्द घूमती है. फ़िल्म में क्या है, ये देखने के लिए तो आपको थिएटर जाना होगा. लेकिन जैसे ही फ़िल्म देखकर आप थिएटर से बाहर आएंगे, आपको किसी मुजरिम जैसा महसूस होगा. आप सोच में पड़ जाएंगे कि क्या आप सच में एक 'हत्यारा' हैं. उन बेज़ुबान परिंदों के 'हत्यारे '!...