टीम इंडिया के 'प्रयोग' पर सवाल, 4 साल में नहीं मिला नंबर-4 का बल्लेबाज

ऑस्ट्रेलिया ने भारत की सरजमीं पर इतिहास रचते हुए पांच वनडे मैचों की सीरीज को 3-2 से अपने नाम कर लिया. स्टीव स्मिथ और डेविड वॉर्नर की गैरमौजूदगी में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत की धरती पर कदम रखी तो क्रिकेट एक्सपर्ट मान रहे थे कि भारत आसानी से इस सीरीज को अपने नाम कर लेगा, लेकिन बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला के मैदान पर जो हुआ वो इतिहास में दर्ज हो गया. सीरीज की शुरुआत में भारतीय टीम ने जैसा खेल दिखाया उससे एक्सपर्ट्स की बातों को और दम मिल गया था. लेकिन इसके अगले 3 मैचों में जो हुआ वो भारतीय टीम को चिंता में डाल देने वाला है.

सीरीज के अगले तीनों ही मैच में विराट सेना को हार का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं किक्रेट इतिहास में अब तक सिर्फ पांच बार हुआ कि कोई टीम शुरुआती 2 मैच जीतने के बाद सीरीज हारी हो. भले ही भारतीय टीम सीरीज हार गई हो, लेकिन उसको इन पांच मैचों से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा. अब जब वर्ल्ड कप होने में करीब 75 दिन बाकी हैं और क्रिकेट के महाकुंभ से पहले भारतीय टीम की यह आखिरी सीरीज थी, तो ऐसे में उसके सामने टीम कॉम्बिनेशन तय करने का बेहतरीन मौका था. लेकिन अफसोस इस बात का है कि विराट कोहली पूरे सीरीज में प्रयोग ही करते रहे और अंत में निराशा हाथ लगी.

हां, हम यह जरूर मान सकते हैं कि विश्व कप के जो 11 खिलाड़ी मैदान में उतरेंगे उनमें से 10 के नाम तो पक्के हैं. असमंजस की जो स्थिति है वो 4 नंबर के बल्लेबाज को लेकर है. शुरुआती मैच में टीम इंडिया रोहित शर्मा, शिखर धवन, विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, केदार जाधव, हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव या चहल, मो. शमी, भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह के साथ मैदान में उतर सकती है. ये उन 10 खिलाड़ियों के नाम हैं जिनका 11 में खेला जाना तय माना जा रहा है.

हां पिच के हिसाब से कप्तान कोहली 2 स्पिनर या 2 पेसर के साथ या 1 स्पिनर या 3 पेसर के साथ उतर सकते हैं. इंग्लैंड की पिच तेज गेंदबाजों के लिए मुफीद मानी जाती है. ऐसे में भारतीय टीम 3 पेसर के साथ भी मैदान में उतर सकती है. भारतीय टीम के लिए जो सबसे बड़ा सिरदर्द है वो नंबर 4 का बल्लेबाज है.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में विराट कोहली ने अंबाती रायडू, विजय शंकर से लेकर रिषभ पंत तक को मौका दिया. लेकिन इन तीनों ही बल्लेबाजों ने कोहली के सिरदर्द को कम नहीं होने दिया.

हालांकि खुद कोहली भी इसके लिए जिम्मेदार हैं. क्योंकि टीम इंडिया का ये कप्तान टीम में बदलाव करने पर विश्वास रखता है. एक ओर जहां महेंद्र सिंह धोनी एक ही टीम खिलाने पर विश्वास रखते थे तो वहीं कोहली उनके ठीक विपरीत हैं. खैर हर कप्तान की अपनी-अपनी स्टाइल होती है, लेकिन कोहली के इस स्टाइल से भुगतना पड़ रहा है भारतीय टीम को.

4 साल में 10 से ज्यादा बल्लेबाज आजमा चुके हैं किस्मत

2015 विश्व कप के बाद से भारतीय टीम इस क्रम पर अब तक 10 से ज्यादा बल्लेबाजों का इस्तेमाल कर चुकी है. लेकिन इन बल्लेबाजों में उसको एक भी ऐसा बल्लेबाज नहीं मिला जो इस क्रम पर लगातार रन बना सके. युवराज सिंह, विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी इस क्रम पर बल्लेबाजी करने उतर चुके हैं. युवराज तो खराब फॉर्म के कारण पहले ही टीम से बाहर हैं. कोहली 4 पर बल्लेबाजी करते हैं तो 3 नंबर को उनकी जैसी काबिलियत वाला बल्लेबाज नहीं मिलता.

वहीं धोनी 4 पर बल्लेबाजी करते हैं तो 5 नंबर पर उनके जैसा फिनिशर नहीं मिलता है. सुरेश रैना को भी इस नंबर पर बल्लेबाजी का मौका मिला, लेकिन वो भी इस कमी को पूरी नहीं कर पाए. इस दौरान मनीष पांडे और केदार जाधव को टीम ने ट्राई किया, लेकिन निराशा वहां भी मिली.

फिट थे रहाणे

टेस्ट टीम के उपकप्तान अंजिक्य रहाणे को नंबर 4 पर बल्लेबाजी का मौका मिला, लेकिन टीम उनसे जो उम्मीद कर रही थी शायद वह उसको पूरी नहीं कर पाए. अगर हम बाकी बल्लेबाजों की तुलना में देखें तो रहाणे ने इस नंबर पर अच्छी बल्लेबाजी की. नंबर 4 पर ऐसे बल्लेबाज की जरूरत होती है तो स्ट्राइक को रोटेट कर सके और जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में चौके-छक्के भी लगाते रहे, रहाणे में वो क्षमता है, लेकिन शायद कोहली के उम्मीद के मुताबिक उनका खेल नहीं रहा.

रहाणे ने नंबर 4 पर 25 पारियां खेली हैं और करीब 37 के औसत से रन बनाए हैं. वहीं मनीष पांडे को 4 नंबर पर बल्लेबाजी करने का मौका मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में खेली उनकी शतकीय पारी को छोड़ दें तो वो छाप छोड़ने में असफल ही रहे.

दिनेश कार्तिक जो अपने पूरे करियर में लगातार कभी एक नंबर पर बल्लेबाजी नहीं कर सके, उनको भी नंबर 4 पर आजमाया गया. हालांकि उन्होंने इस नंबर पर बढ़ियां प्रदर्शन किया. नंबर 4 पर बल्लेबाजी करते हुए उनका औसत करीब 39 का रहा. लेकिन जो सबसे बड़ी बात उनके खिलाफ रही वो ये कि कार्तिक लंबी पारी खेलने में असफल रहे. कार्तिक 40 से 50 रन तो जरूरत बना लेते हैं, लेकिन उसको शतक में तब्दील करने में वो मात खा जाते हैं.

इस दौरान टीम ने केदार जाधव का भी 4 नंबर पर प्रयोग किया. केदार भी यहां पर फिट नहीं बैठे. उनको सफलता 6 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए मिली. हाल के मैचों में केदार 6 नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए कई अच्छी पारियां खेल चुके हैं. और टीम उनको एक फिनिशर के रूप में देख रही है. भारतीय टीम  इन चार वर्षों में लोकेश राहुल, मनोज तिवारी जैसे बल्लेबाजों का भी नंबर 4 पर इस्तेमाल की, लेकिन उनसे भी निराशा ही हाथ लगी.

अंबाती रायडू ने भी किया निराश

भारतीय टीम को जो सबसे बड़ी निराशा मिली वो अंबाती रायडू से रही. भारतीय टीम हैदराबाद के इस बल्लेबाज की ओर उम्मीदों से देख रही थी. लेकिन शायद रायडू उम्मीदों पर उतने खरे नहीं उतर पाए. हालांकि माना जा रहा है कि विश्व कप में नंबर 4 पर वही बल्लेबाजी कर सकते हैं. अब वह 'मजबूरी' का ही नाम है. मजबूरी का नाम इस वजह से क्योंकि आपके पास कोई विकल्प नहीं है.

रायडू का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा कि उनको इस टीम में जगह मिले. हां वह बीच-बीच में जरूर कुछ बढ़ियां प्रदर्शन किए. न्यूजीलैंड में संकट की स्थिति में खेली गई 90 रन की पारी जरूर उनके पक्ष में जा सकती है. लेकिन बात सिर्फ यहीं पर खत्म नहीं होती. जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में रायडू ने प्रदर्शन किया और टीम ने आखिरी के मैचों में उन्हें बेंच पर बैठाया, उससे भी कहीं ना कहीं ये जरूर संकेत मिल रहे हैं टीम रायडू पर पूरी तरह से विश्वास नहीं करती है.

इस दौरान टीम ने विजय शंकर को भी इस नंबर पर मौका दिया. शायद टीम को ये उम्मीद थी शंकर रायडू से अच्छा प्रदर्शन कर दें और इस 'महाखोज' को समाप्त कर दें, लेकिन हुआ भी वैसा नहीं. अंत में बात वहीं आकर खत्म होती है कि कौन होगा नंबर 4 का बल्लेबाज. क्या लगातार प्रयोग करने से टीम को भुगतना पड़ेगा नतीजा. क्योंकि कप्तान कोहली अगर किसी एक खिलाड़ी पर भरोसा जताए होते तो शायद आज हालात कुछ और होते.

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